क्या भारत जोड़ो यात्रा राहुल गाँधी की छवि बदल पायेगी और किस हद तक ।
मार्केटिंग में एक बहुत बड़ा फंडा ये है कि जो दिखता है वो बिकता है और यह आज की राजनीति का यथार्थ बन गया है । राजनेता को एक ब्रांड के रूप में स्थापित करना तथा उसके इर्द गिर्द ही पुरे चुनाव को केंद्रित कर देना इस बात का द्योतक है कि जनता के समसामयिक मुद्दे को किस हद तक प्रभावित किया जा सकता है ।
अभी तक भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का ब्रांड इमेज काफी मजबूत है और इसके आसपास भी कोई नहीं दिख रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की एक मजबूत छवि बानी है जिसमें उनका प्रभाव एक बहुत बड़े राजनेता के रूप में भाषित होता है । उन्होंने अपने प्रभाव को अंतर्राष्ट्रीय स्टार पर भी काफी मजबूती से पेश किया है । शक्तिशाली देशों के नेताओं के साथ उनकी निकटता और सम्बन्ध उनकी छवि को और मजबूती प्रदान करता है ।
जहाँ तक श्री राहुल गाँधी का सवाल है, उनका व्यक्तित्व पर हमेशा एक प्रश्नचिन्ह लगता रहा है कि वह एक गंभीर राजनितज्ञ नहीं हैं या राजनीती कोई गंभीरता से नहीं लेते हैं । श्री राहुल गाँधी का यह कहना की उनके इस व्यक्तित्व को जनता के बीच में बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने काफी पैसे खर्च किये हैं, इसमें मीडिया का बहुत बड़ा योगदान रहा है । और इस छवि को उन्होंने इस भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से तोड़ दिया है ।
इन सभी सन्दर्भों को ध्यान में रखते हुए, हम इस बात की विवेचना करेंगे कि क्या सचमुच भारत जोड़ो यात्रा से राहुल गाँधी के छवि में सुधार हुआ है । तो इस बात का एक जवाब है - हाँ, बहुत ही शानदार तरीके से । उनकी लगातार यात्रा ने उनकी इस छवि को एकदम से पलट दिया है कि वह एक पूर्णकालिक राजनेता नहीं हैं । यह पूरी भारत जोड़ो यात्रा में कहीं से कोई बनावटीपन नहीं लग रहा है । पूरी यात्रा एक स्वाभाविक गति से चल रही है और काफी प्राकृतिक लग रही है । राहुल गाँधी ने इस पूरी यात्रा के दौरान लगभग जितने भी प्रेस कांफ्रेंस किये हैं वो काफी परपक्व लग रहा है । इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि वो उनका उद्देश्य काफी साफ़ है और उनको यह पता है कि आगे क्या करना है ।
इस यात्रा के दौरान अगर हम इस बात पर गौर करें की आगे की कांग्रेस पार्टी कैसी होगी तो यह भी लगभग श्री राहुल गाँधी से साफ कर दिया है । कांग्रेस के जो भी धाकड़ नेता पार्टी को छोड़कर गए हैं, उनकी जगह पार्टी में आगे शायद ही कभी हो पायेगी । आगे शायद पार्टी में वही लोग चल पाएंगे जो की २०२४ के चुनाव तक जी जान लगा कर पार्टी के लिए काम कर पाने में समर्थ हों ।
राहुल गाँधी के साथ चलती हुयी भीड़ ने यह साबित किया है कि अभी भी गाँधी परिवार अगर सड़क पर आकर लड़े तो उसे जनता का बहुत व्यापक समर्थन प्राप्त होगा । साथ ही यह एक बहुत बड़ा सत्य है कि जनता का एक बहुत बड़ा प्रतिशत है जो यह मानता है कि एक मजबूत विपक्ष का होना इस देश के लिए बहुत ही जरुरी है और यह बात कांग्रेस पार्टी के पक्ष में जाती है ।
बहुत से लोग अब इस बात को मानने लगे हैं की रही गाँधी की सोच नोटबंदी और कोरोना के बारे में काफी हद तक सही थी और यह उनके दूरदर्शिता को दर्शाता है ।
इस पुरे यात्रा के दौरान भारतीय जनता पार्टी यह तलाशती रही की राहुल गाँधी को किस मुद्दे पर घेरा जाय और वह इस बात में बुरी तरह असफल रही है ।
यह बात बहुत ही स्पष्ट तौर पर कही जा सकती है कि भारत जोड़ो यात्रा से राहुल गाँधी ने अपने आपको भारतीय राजनीती में मजबूती से स्थापित किया है ।
अगर राहुल गाँधी को इस यात्रा से कांग्रेस को वापस सामने लाना है तो उनको आनेवाले दिनों के विधानसभा चुनाव में काफी मेहनत करनी होगी और उनको यह सामने से एक लीडर की भांति लड़ना होगा । हरेक राज्य के विधान सभा चुनाव में उनको काफी समय और प्रचार करना होगा जिस प्रकार श्री नरेंद्र मोदी जी ने गुजरात चुनाव में किया है । श्री राहुल गाँधी को यह ध्यान रखना होगा कि उनके सामने एक ऐसी पार्टी है जो उनकी हरेक कमजोरी और गलती का पूरा फायदा उठाना जानती है।