मंगलवार, 13 दिसंबर 2022

 राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra by Rahul Gandhi ) - विवेचना

राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा

आज हम इस बात की विवेचना करेंगे की श्री राहुल गाँधी द्वारा की जा रही भारत जोड़ो यात्रा का कितना फायदा उनकी छवि, कांग्रेस पार्टी को पहुंचेगा और यह भारतीय जान मानस के लिए कितना प्रभावी होगा । किसी भी नतीजे पर पहुँचने से पहले हम इसकी विवेचना व्यापाक रूप से ऐतिहासिक, सामाजिक एवं विश्लेषलात्मक सन्दर्भ में करेंगे ।

अगर हम यात्राओं का इतिहास देखें तो यह काफी पुराना है और यह बात सर्वविदित है कि इससे यात्रा करने वालों को कोई न कोई फायदा ही हुआ है । महात्मा गाँधी द्वारा दांडी मार्च जो की 1930 में किया गया था जो की भारत के स्वंत्रता इतिहास में मील का पत्थर है । भारत के  स्वंत्रता संग्राम में इस मार्च का एक महत्वपूर्ण स्थान है जिसको भारतीय नागरिकों का एक व्यापक समर्थन मिला था । तदुपरांत विनोबा भावे का भूदान आंदोलन अपने आप में एक अनोखा आंदोलन था । १९५१ ई० में शुरू किया गया यह आंदोलन उनकी पदयात्रा के साथ साथ चला । फिर क्रमिक रूप से अगर हम देखें तो चंद्रशेखर एवं वाय एस राजशेखर रेड्डी की यात्रा बहुत महत्वापूर्ण रही ।

राहुल गाँधी की यह पदयात्रा कई मायनो में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सबसे लम्बी यात्रा हो रही तथा कन्याकुमारी से शुरू होकर कश्मीर तक जा रही है ।  इस यात्रा के तहत लगभग १२ राज्य और दो केंद्र शासित प्रदेश जोड़े गए हैं । अभी तक जिन सभी राज्यों से होकर यह यात्रा गुजर रही है वहां पर इसे अभूतपूर्व स्वागत मिल रहा है और सभी वर्ग के लोग इससे जुड़ रहे हैं । लेकिन सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न है कि इस यात्रा से राहुल गाँधी और कांग्रेस को क्या फायदा मिल सकता है या यह सिर्फ एक यात्रा ही बनकर रह जाएगी ।

सबसे पहले कांग्रेस पार्टी की स्वॉट एनालिसिस करते हैं और इस बात को जानने का प्रयास करते हैं कि यह यात्रा किस हद तक कांग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है । इस यात्रा के बाद, कौन कौन से क्षेत्र में पार्टी को ध्यान देने की जरूरत होगी और भारतीय जनता पार्टी को किस तरह यह यात्रा आने वाले दिनों के चुनाव में परेशान कर सकती है ।

स्वॉट एनालिसिस में चार वर्ड हैं पहला स्ट्रेंग्थ, दूसरा वीकनेस, तीसरा अपोटॊयूनिटी  एवं चौथा थ्रेट ।

अब इस यात्रा का कांग्रेस पार्टी के परिपेक्षय में हम स्वॉट एनालिसिस  करेंगे और जानने की कोशिश करेंगे की कौन कौन सी ऐसी जगह है जहाँ इस यात्रा का फायदा हो सकता है और किन जगहों पर पार्टी को ध्यान देने की जरुरत हो सकती है ।

पहला स्ट्रेंग्थ

अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी, भारत की सबसे पुरानी पार्टी है जिसका मूल उद्देश्य भारतीय स्वंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ना था । कालांतर में यह पार्टी स्वाधीनता के बाद सत्ता में आयी और काफी लम्बे समय तक सत्ता में रही । इस पार्टी की सबसे बड़ी ताकत यह है की इसकी उपस्थिति भारत के लगभग हर गांव और शहर में है और किसी न किसी तौर से लोग इस पार्टी से एक जुड़ाव महसूस करते हैं । इस पार्टी की आइडियोलॉजी से सभी वाकिफ हैं और किसी को इस पार्टी के इतिहास के बारे में अलग से बताने की जरुरत नहीं है । इस पार्टी का विस्तार पुरे भरतवर्ष में उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम में है । यह इस पार्टी की सबसे बड़ी ताकत है जो की आज की तारीख में भारत के किसी भी पार्टी के पास नहीं है यहाँ तक कि भारतीय जनता पार्टी के पास भी नहीं जो की विश्व की सबसे बड़ी पार्टी मानी जाती है ।

यात्रा का प्रभाव -

- यह यात्रा कांग्रेस के समर्थको या पूर्व समर्थको जो कि अपने आप को एक लीडरशिप विपन्नता की स्थिति में मानते है, को सोचने को मजबूर करेगा ।

- यह कांग्रेस की छवि को बेहद मजबूत कर रहा है कि यह पार्टी जमीन पर जनता के साथ, जनता के मुद्दों के लिए खडी है ।

- लोग पार्टी से खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं ।

दूसरा वीकनेस

कांग्रेस पार्टी जब से सत्ता से गयी है, उसकी सबसे बड़ी कमजोरी उनके मठाधीश नेता रहे हैं । इन नेताओं का जनता से संवाद लगभग नहीं का रहा है और ये सभी अपने कार्यकर्ताओं से भी काफी दूर चले गए । संगठन का अभाव, कार्यकर्ताओं में उत्साह का आभाव और एक लीडरशिप की कमी जो कार्यकर्ताओं में जोश पैदा कर सके । मौकापरस्त नेताओं द्वारा पार्टी से पलायन ने भी पार्टी की छवि को काफी नुकसान पहुँचाया है ।

यात्रा का प्रभाव -

- इस यात्रा में यह भी पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया गया है कि पार्टी छोड़कर जानेवाले और पार्टी के खिलाफ टिप्पणी करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं है

- नेताओं के पास पूरा मौका है कि वो जनता से रु-ब-रु होकर उनकी समस्याओं को सुने । यह काम राहुल गाँधी बखूबी कर रहें हैं पर जरुरत ये भी है कि उस प्रदेश के नेता जहाँ से यात्रा गुजर रही है जनता के समस्याओं को ध्यान से सुने और कांग्रेस जो भी प्रेस ब्रीफिंग करती है उसमे उन नेताओं को तरजीह देनी चाहिए ।

- इस यात्रा ने राहुल गाँधी को एक नए रूप से निखार दिया है जो की कांग्रेस पार्टी की वीकनेस को ताकत में परिवर्तित कर दिया है और आने वाले दिनों में इसका प्रभाव दूरगामी होने जा रहा है ।

तीसरा अपोटॊयूनिटी 

कांग्रेस पार्टी के लिए अब खोने के लिए कुछ भी नहीं बचा है और वह जीरो से शुरू कर रही है । अगर इस सन्दर्भ में देखें तो पूरा देश उनके लिए एक अपोटॊयूनिटी  के रूप में परिलक्षित हो रहा है

यात्रा का प्रभाव -

- यह यात्रा कांग्रेस में एक प्रकार से संजीविनी का काम करेगी ।

- कांग्रेस को जनता के मुद्दों से भटकना नहीं चाहिए जिसपर की पार्टी अभी तक अडिग है ।

- यह कांग्रेस मुक्त भारत के मिथ को पूरी तरह से ख़तम कर देगी ।

- विपक्षी दलों में कांग्रेस की स्थिति मजबूत होगी ।

एवं चौथा थ्रेट

कांग्रेस पार्टी के लिए सबसे बड़ी थ्रेट आम आदमी पार्टी है न की भारतीय जनता पार्टी । आम आदमी पार्टी की पहुँच धीरे धीरे बढ़ रही है और इस पार्टी की राजनीती के कारण कांग्रेस को आने वाले दिनों में साउथ में नुकसान हो सकता है जिसका अभी तक उसको अंदाजा नहीं है । दूसरी सबसे बड़ी समस्या इस यात्रा के बाद भारतीय जनता पार्टी द्वारा किसी मेगा इवेंट का होना होगा जिसका उद्द्शेय इस यात्रा के प्रभाव को हल्का करना तथा नया नैरेटिव सेट करना होगा । इस थ्रेट का आकलन कांग्रेस पार्टी को अभी से करना होगा ।

अगर इस यात्रा का आकलन करें तो यह कांग्रेस पार्टी के लिए वरदान साबित होगी ।

मैं अपने अगले ब्लॉग में इस विषय के ऊपर विवेचना करूँगा की इस यात्रा के बाद कांग्रेस पार्टी या राहुल गाँधी का अगला कदम क्या हो सकता है और भारतीय जनता पार्टी इस यात्रा का कैसे काउंटर नैरेटिव सेट करती है

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें